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India vs Australia: मेलबर्न में डेब्यू, ब्रिसबन में सरताज- शाबाश सिराज....

ब्रिसबेन मोहम्मद सिराज की गेंद को जोश हेजलवुड ने थर्डमैन की ओर खेला। गेंद हवा में थी और शार्दुल ठाकुर उसके नीचे। ठाकुर ने कोई गलती नहीं की। यह सिराज का पारी में पांचवां विकेट था। टेस्ट करियर में पहला। पहली ही सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और वह भी उसी की धरती पर। दो मैच पहले डेब्यू करने वाले सिराज इस मैच में टीम के सबसे सीनियर गेंदबाज थे। पांच विकेट पूरे होने के बाद सिराज ने सिर ऊपर उठाया। आंखें बंद कीं। जैसे शुक्रिया अदा कर रहे हों। और उस पिता को याद कर रहे हों जिसने उन्हें क्रिकेटर बनाने का सपना देखा था। फिर दोनों हाथों से थम्स अप किया जैसे पिता से कह रहे हों मैंने कर दिखाया। वही पिता जिसके निधन के वक्त सिराज उन्हें देख भी नहीं पाए। वह इसी ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर थे जब उनके पिता का निधन हुआ। कोविड-19 के चलते प्रतिबंधों की वजह से वह भारत नहीं जा सके। लेकिन उन्होंने पिता के सपनों को पूरा करने की ठानी। पूरे जज्बे के साथ खेले। और उनके पिता भी अपने बेटे के इस खेल से खूब फख्र महसूस कर रहे होंगे। बॉर्डर-गावसकर सीरीज मैच के दूसरे मैच में उन्होंने डेब्यू किया। मेलबर्न उनके करियर का पहला मुकाबला था। वहां जब राष्ट्रगान बजा और सिराज की आंखों से बहते आंसू दुनिया ने देखे। दिल में दर्द था। पिता की याद थी जिसने उन्हें क्रिकेट खिलाने के लिए कई त्याग करे। इसके बाद हालात ऐसे बने कि सीरीज का आखिरी मैच आते-आते वह टीम में सबसे सीनियर बोलर थे। गेंदबाजी आक्रमण के अगुआ। और ब्रिसबेन में उन्होंने इसे साबित भी किया। वह साथी तेज गेंदबाजों से बात करते नजर आए। जिम्मेदारी ने शायद उन्हें निखारा। वह भले ही आईपीएल से खास पहचान बनाई हो लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्हें लंबे स्पैल के लिए जाना जाता है। वह 40 फर्स्ट क्लास मैचों में 7356 गेंदें फेंक चुके है। इस फॉर्मेट में सिराज के नाम 40 मैचों में 159 विकेट हैं। स्ट्राइक रेट 46.2 का। यानी 8 ओवर से भी कम में एक विकेट। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में उन्होंने पांच विकेट लिए। उन्होंने अपने प्रदर्शन से सबका दिल जीत लिया। आंकड़े भी कहीं न कहीं बताते हैं कि उन्होंने किस तरह से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को परेशान किया। लेकिन सबसे ज्यादा जिस चीज ने सबका दिल जीता वह था उनका जज्बा। हर बार जब वह गेंद लेकर दौड़े तो पूरे जोश के साथ गेंदबाजी की। वह शत-प्रतिशत दे रहे थे। वह बल्लेबाजों के नाम से नहीं प्रभावित थे। फिर चाहे वह आक्रामक डेविड वॉर्नर हों या फिर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शुमार स्टीव स्मिथ। क्रिकेट की सनसनी मार्नस लाबुशेन को भी सिराज ने परेशान किया। सिराज ने लाबुशेन को ही आउट कर अपनी पहली कामयाबी हासिल की। गेंद टप्पा लगने के बाद तेजी से उठी। लाबुशेन क्रीज पर जमे रह गए। उन्होंने डिफेंड करने की कोशिश की लेकिन गेंद कुछ ज्यादा ही अच्छी थी। उसने बल्ले का किनारा लिया और सीधा रोहित शर्मा के हाथों में गई। यह यह विकेट काफी अहम था क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने हाथ खोलने शुरू किए थे। कंगारू बल्लेबाज भारत को दबाव में लाना चाहते थे। लेकिन सिराज ने यह विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया के प्लान को ठेस पहुंचाई। सिराज का अगला शिकार बने बाएं हाथ के बल्लेबाज मैथ्यू वेड। गेंद वेड के पैड पर थी। उन्होंने फ्लिक करना चाहा लेकिन गेंद बल्ले पर पूरी तरह नहीं आई। हल्का सा किनारा लगा और विकेट के पीछे पंत ने अपने दाएं ओर छलांग लगाते हुए कैच लपक लिया। बिग फिश। जी, इसके बाद सिराज के निशाने पर आए बिग बिश स्टीव स्मिथ। स्मिथ जो दुनिया के बेस्ट बल्लेबाज कहे जाते हैं, सिराज की एक उठती हुई गेंद पर चूक गए। स्मिथ बैकफुट पर गए लेकिन गेंद उठती चली आई। वह बिलकुल भी कंट्रोल में नहीं थे। गेंद उनके अंगूठे से लगती हुई गली में रहाणे के पास गई। स्मिथ को लगा गेंद जब टकराई जब दस्ताने बल्ले पर नहीं था। लेकिन रिव्यू का फैसला अलग था। स्मिथ को जाना पड़ा। गेंद लेंथ पर पड़ने के बाद ऐसी उछली जिसे देखकर कोई भी तेज गेंदबाज खुश होगा। हो सकता है कि गेंद दरार में पड़ी हो लेकिन सिराज को सही लाइन और लेंथ पर टप्पा डालने का इनाम तो मिलना ही चाहिए था। स्टार्क को आउट कर लगाया चौका ऑस्ट्रेलिया अब तेजी से रन बनाने में जुटा था। मिशेल स्टार्क भले ही गेंदबाजी के लिए जाने जाते हों लेकिन बल्ला भी खूब मांजते हैं। तेजी से रन बनाने में उस्ताद हैं। लेकिन सिराज ने उन्हें क्रीज पर ज्यादा वक्त नहीं बिताने दिया। स्टार्क ने मिड-ऑफ के ऊपर से मारने की कोशिश की। लेकिन सैनी ने आसान सा कैच किया। शार्दुल ने लिए चार विकेट सिराज के साथ ही शार्दुल ने भी कमाल दिखाया। उन्होंने चार विकेट लिए। दिल-जिगरा लगाकर गेंदबाजी की। उन्होंने चार विकेट लिए। आखिरी विकेट लेने के लिए सिराज और ठाकुर में प्रतियोगिता थी। बाजी सिराज के हाथ लगी लेकिन सहयोग ठाकुर का मिला। शायद इसी को डेस्टनी कहते हैं। सिराज जब पांच विकेट लेकर पविलियन लौट रहे थे तो उन्हें टीम की अगुआई करने का मौका मिला। कप्तान रहाणे ने वह लाल गेंद उनके हाथों में थमाई। यह यादगार है। आखिर इसी से उन्होंने यह मुकाम जो हासिल किया है। बाउंड्री लाइन पर खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस यु्वा गेंदबाज के प्रदर्शन को सराहा। सिराज बेशक खुश थे। सिराज के पीछे-पीछे ठाकुर थे। इस जोड़ी के अहम किरदार। उनका खेल भी किसी से कम नहीं रहा। पर टीम को लीड सिराज ही कर रहे थे..


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