Header Ads

Header ADS

2 मीहने बाद भी सुशांत सिंह राजपूत के लौटने का इंतजार कर रही हैं ये निगाहें, जानें मालिक की मौत का पालतू डॉग पर कितना बुरा असर होता है

सुशांत सिंह राजपूत को गुजरे 2 महीने हो चुके हैं। ऐक्टर ने जिस तरह से अचानक इस दुनिया को अलविदा कहा उससे उनका परिवार, दोस्त, फैन्स और यहां तक कि उनका पालतू कुत्ता भी सदमे से उबर नहीं पा रहा है। सुशांत की भांजी ने कुछ समय पहले ही एक विडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि आज भी जब दरवाजा खुलता है, तो ऐक्टर का डॉग फज उम्मीद भरी नजरों से ताकता है कि उसका ओनर वापस आएगा।

कारण समझ नहीं पाते डॉग
व्यक्ति के लिए उसकी जिंदगी में बहुत सारी चीजें और लोग हो सकते हैं, लेकिन एक पेट डॉग के लिए उसका ओनर ही पूरी दुनिया होता है। यही वजह है कि मालिक के अचानक गुजर जाने पर डॉग्स समझ नहीं पाते कि उनके ओनर वापस क्यों नहीं आ रहे हैं? एक्सपर्ट्स की मानें, तो डॉग इस बात में फर्क महसूस नहीं कर पाते कि उन्हें छोड़ दिया गया है या फिर मालिक की मौत हो गई है। उनके लिए बस एक ही भावना होती है कि उनके लिए जो व्यक्ति पूरी दुनिया था, वह उनके साथ नहीं है। यह चीज उन्हें बुरी तरह से विचलित कर देती है।

ऐंग्जाइटी
ओनर के घर से बाहर जाने पर भी डॉग्स उनका बेसब्री से लौटने का इंतजार करते हैं। कई पालतू कुत्तों को ऐंग्जाइटी इशू के लिए डॉक्टर से ट्रीटमेंट तक दिलवाना पड़ता है। ऐसे में आप खुद ही समझ सकते हैं कि जब मालिक कभी वापस ही न आए, तो उस स्थिति में डॉग का सैपरेशन ऐंग्जाइटी लेवल क्या होता होगा?

प्रत्युषा बनर्जी-सुशांत सिंह राजपूत के केस की वो 5 समानताएं, जिनके बारे में सभी को जरूर जानना चाहिए

मर जाती है भूख

अमेरिकन सोसायटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू ऐनिमल्स (ASPCA) के मुताबिक, किसी को खोने पर ह्यूमन और डॉग के दुख जाहिर करने के तरीके में अंतर होता है। ज्यादातर मामलों में ओनर के नहीं लौटने पर डॉग का एनर्जी लेवल गिर जाता है। वह खाना भी कम कर देता है। उसके फेवरिट फूड्स भी उसे अट्रैक्ट नहीं कर पाते हैं। ऐसे कई मामले हैं, जिनमें इस स्थिति के कारण डॉग को मेडिकल सहायता दिलवानी पड़ी ताकि उसे जिंदा रखा जा सके।

डिप्रेशन
पपी की उम्र से ओनर के साथ ही अपनी जिंदगी बिताने वाले डॉग के लिए अचानक अलग हो जाना उसे डिप्रेशन में डाल देता है। उसकी चीजों में रुचि खो जाती है और वह अक्सर आवाज निकालते हुए अपना दुख प्रकट करता है। फज की तरह ज्यादातर डॉग दरवाजे पर ही निगाहें गड़ाए रख अपने ओनर के लौटने का इंतजार करते हैं।

इतना सब होने के बाद भी खास है अंकिता लोखंडे और विक्की जैन का रिश्ता, गर्लफ्रेंड हो ऐसी तो नहीं बिगड़ती बात

मुश्किल होता है मूव ऑन

ज्यादातर मामलों में डॉग्स इस पूरी स्थिति से मूव ऑन हो जाते हैं, लेकिन इसमें उन्हें कुछ महीनों से लेकर सालों तक का समय लग सकता है। वहीं कुछ डॉग्स के लिए मूव ऑन करना ही मुश्किल होता है। वे दूसरों को वह स्थान या लगाव नहीं दे पाते, जो वे अपने असली ओनर को दे पाते थे।

Powered by Blogger.