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जुन्नारदेव की माटी शुभ जीवन में बहुत योगदान, मौका मिला तो क़र्ज़ उतारूंगा - डॉ टाटा

छिन्दवाड़ा/जुन्नारदेव:- जुन्नारदेव की माटी मेरे लिए शुभ है साथ ही मेरे परिवर्तित हुए जीवन में इस माटी का बहुत योगदान है उक्त आशय के विचार आयुर्वेदाचार्य गुरुजी डॉक्टर प्रकाश टाटा ने पत्र प्रतिनिधि से एक अनौपचारिक चर्चा के दौरान व्यक्त किए आगे डॉक्टर टाटा ने स्पष्ट कहा कि इस माटी का कर्ज है जिसे उतारने की मंशा भी है समय ने यदि साथ दिया एवं मौका मिला तो इस कार्य को जरूर पूरा करने का प्रयास करूंगा। Junnardeo news dr tata

आगे डॉक्टर टाटा ने बताया कि बचपन से लेकर जवानी के दिन मैंने बहुत ही दुख में व्यतीत किया मैंने एक गरीब परिवार में जन्म लिया मेरे पिता मजदूरी का कार्य कर परिवार का भरण पोषण करते थे मैं जब 5 वर्ष का एक मासूम बच्चा था उस समय मेरे शरीर में आई अद्भुत शक्तियों के चलते गांव वालों ने मुझे गांव से निकाल दिया।

गुरु के साथ जंगल में बिताए दिन, 1962 में आया जुन्नारदेव

गांव से निकाले जाने के बाद मैंने अपने इस जीवन के 17 वर्ष अपने गुरु श्री श्री अमृतलाल तिवारी के साथ जंगल में व्यतीत किए एवं वहां रह गुरु की सेवा एवं उनसे आयुर्वेद जड़ी बूटियों का ज्ञान प्राप्त किया। आयुर्वेद जड़ी बूटी का ज्ञान प्राप्त कर सन 1962 में पहली बार सुकरी जुन्नारदेव आया एवं वहां के निवासी गणपत सिंह धुर्वे के सहयोग से एक खोली कच्चा मकान मैं डेरा जमाया जहां बोरा की फट्टी बिछा उस पर सोने का कार्य करता था।

खाने को नहीं भोजन पहनने को कपड़ा नहीं

सन 1962 में जब सुकरी जुन्नारदेव आया उस समय इस आयुर्वेद जड़ी बूटी का चलन नहीं था दो-तीन माह हो जाते इस दौरान एक मरीज नहीं आते उस समय खाने को भोजन एवं कपड़े पहनने को नहीं थे इधर उधर से खाना मांग कर खाना बोरा फट्टी कौशल कपड़े बनाना फिर कपड़े पहनना ऐसे दिन काटे।

46 वर्ष काटे पेंच कन्हान में

आयुर्वेद जड़ी बूटी से इलाज करते हुए डाॅं. टाटा ने पेंच-कन्हान में 46 वर्ष काट दिये, एवं पिछलें 10 वर्षाे से छिन्दवाड़ा में रह आ रहे सभी जनों का निःशुल्क उपचार कर रहे हैं। देश ही नहीं विदेशों में कर रहे उपचार – वर्तमान समय में डाॅं.टाटा देश ही नहीं विदेशों में जाकर उपचार कर रहे हैं। एक समय ऐसा भी था जब लोग इस पद्धति से उपचार कराना पसन्द नहीं करते थे। जिसके चलते न खाने को भोजन, न पहनने को कपड़ें थे और एक समय ऐसा भी लोग घंटों इंतजार कर उपचार करा रहे है।

कमलनाथ एवं डाॅं. टाटा दोनों के लिये शुभ हैं जुन्नारदेव की माटी – प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ हो या आयुर्वेदाचार्य गुरूजी डाॅं. टाटा दोनों के शुभ साबित हुई जुन्नारदेव की माटी एक और जहाॅं कमलनाथ पिछले 40 वर्षाे से संसदीय सीट का नेतृत्व किया, किन्तु जब भी चुनाव रहा तो अंतिम सभा जुन्नारदेव में ही करते थे। एवं विजयी होते रहे।वहीं डाॅं. टाटा ने भले ही जीवन के प्रारंभिक दिवस भारी दुखों में व्यतीत किया किन्तु इस जुन्नारदेव की माटी में पैर रखने से वर्तमान समय सुखमय से भरा है। जुन्नारदेव का कर्ज मानते हैं एवं डाॅ. टाटा इस जुन्नारदेव के लिये कुछ तो ऐा करेंगे जिससे उक्त कर्ज उतर सकें।

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