वास्तु शास्त्र के अनुसार सकारात्मक ऊर्जा हमेशा पूर्व से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण या या पूर्वात्तर से दक्षिण-पश्चिम के नैऋत्य कोण की ओर बहती है।