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कम मौके मिलने पर तिवारी बोले, 'मिडिल ऑर्डर में जगह थी'

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेटर को लगता है कि मिडल-ऑर्डर में जगह होने के बाद भी उन्हें बैंच पर बैठना पड़ा। तिवारी ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच-जिताऊ सेंचुरी लगाने के बाद भी मुझे लगातार 14 मैच प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली। तिवारी से जब पूछा गया कि क्या 2010-2013 के बीच जब मिडल-ऑर्डर में का प्रदर्शन अच्छा नहीं था तो उनकी जगह पर वह टीम का हिस्सा हो सकते थे तो तिवारी ने कहा, 'मिडल-ऑर्डर में काफी जगह थी जिसमें मैं इन खिलाड़ियों के साथ फिट हो सकता था।' स्पोर्ट्सकीड़ा से बात करते हुए तिवारी ने कहा, 'जब हम ऑस्ट्रेलिया गए, तो मिडल ऑर्डर में ज्यादातर बल्लेबाज रन नहीं बना रहे थे।' भारतीय टीम जब 2011-2012 की कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया गई तो सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीयों में विराट कोहली और गौतम गंभीर शामिल थे और ये दोनों टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज थे। 34 वर्षीय बंगाल के इस क्रिकेटर ने कहा कि उन्हें ठीक ठाक संख्या में मैच खेलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब वह दोबारा वनडे टीम का हिस्सा बने तो छह महीने और 14 मैच निकल चुके थे। भारत के श्रीलंका दौरे पर उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। साल 2012 के सीरीज में उन्होंने चौथे मुकाबले में गेंद से भी बढ़िया खेल दिखाया। उन्होंने 61 रन देकर चार विकेट लिए और इसके बाद अगले मैच में 68 गेंद पर 65 रन बनाए। तिवारी को डंकन फ्लेचर का वह फैसला भी समझ नहीं आया जब तत्कालीन कोच ने उन्हें सिर्फ दूसरे वनडे इंटरनैशनल मैच में पारी की शुरुआत करने को कहा। वह उस मैच में सिर्फ दो रन बनाकर आउट हुए। तिवारी को हालांकि रोहित शर्मा से कोई गिला नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैं किसी के साथ तुलना नहीं करना चाहता। रोहित एक शानदार क्रिकेटर रहे हैं।' तिवारी ने कहा कि उन्हें हमेशा से रोहित की क्षमता पर भरोसा है। तिवारी ने याद किया कि कैसे जोनल मुकाबले में रोहित ने तिवारी की टीम के खिलाफ तेज सेंचुरी बनाई थी।


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