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श्वेता बच्चन को खल रही है पापा अमिताभ की कमी, वो पिता ही है जो बिन बोले समझ जाते हैं बेटी के मन की बात

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कहते हैं कि पिता और बेटियों का बंधन जन्म से ही एक अनोखा होता है। जिन बेटियों के संबंध अपने पिता के साथ अच्छे होते हैं, वे भाग्यशाली होती हैं। ऐसे में जब वे बड़ी होती हैं तो उन्हें अपने पिता के साथ न केवल बचपन के अनुभवों को जीने का मौका मिलता है, बल्कि जीवन में आने वाले अन्य पुरुषों के प्रति भी उनका व्यवहार उदार होता है। वहीं, जिस पिता का स्वभाव या व्यवहार अपनी बेटी के प्रति पूरी तरह सही न रहा हो, तो ऐसी बेटियों के अंदर आत्मसम्मान की भावना पैदा हो जाती है। यहां तक कि उन्हें पुरुषों पर भरोसा करने में भी थोड़ी परेशानी हो सकती है। हालांकि, बदलते समाज ने बाप-बेटी के रिश्ते को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत किया है।

आज बेटियां पिता को कंधा देने से लेकर घर तक की जिम्मेदारी उठाने में सक्षम हैं। वहीं, पिता भी बेटों का हाथ छोड़ बेटियों को पढ़ा-लिखाकर उन्हें मजबूत बनाने में लगे हुए हैं। ऐसा ही कुछ हाल बॉलीवुड की सबसे खास बाप-बेटी की जोड़ी यानी अमिताभ बच्चन और श्वेता बच्चन नंदा का भी है। यह तो हम सभी जानते हैं कि अमिताभ बच्चन बेटे अभिषेक बच्चन बहू ऐश्वर्या राय बच्चन और पोती आराध्या को पिछले हफ्ते कोरोना संक्रमित पॉजिटिव पाए जाने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। …तो अमिताभ बच्चन ने इसलिए जल्दी कर दी थी श्वेता की शादी, बेटे से पहले बेटी के हाथ क्यों पीले कर देते हैं मां-बाप

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हालांकि, मेगास्टार नियमित रूप से अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके फैंस को जल्द स्वस्थ होने की खबरों से अपडेट करते रहते हैं। लेकिन लगता है कि उनकी बेटी यानी श्वेता से अपने पिता की यह हालत देखी नहीं जा रही। तभी तो आजकल श्वेता यूं गुमसुम बस अपने पिता के जल्द से जल्द ठीक होने का इंतजार रही हैं। लेकिन कभी आपने सोचा है कि बेटियों का लगाव मां की अपेक्षा पिता से ज्यादा क्यों होता है? क्यों अक्सर बेटी के कहे बिना ही पिता उसकी तमाम परेशानियों को समझ जाते हैं?

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* इस बात में कोई दोराय नहीं कि बेटियां आज सफल होने के साथ-साथ आत्मविश्वासी भी होती हैं। हालांकि इन सबके के पीछे पिता के स्नेह की एक बड़ी भूमिका रही है, जो उसे वक्त के साथ निडर और साहसी बनाता है। ऐसे में वही पिता उस समय ढाल बनकर खड़ा हो जाता है जब उसकी बेटी को कोई परेशानी होती है।

* वह पल हर बाप के लिए सबसे मुश्किल होता है जब उसकी बेटी अपने ससुराल वालों के गलत व्यवहार के कारण दुखी रहती है। ऐसे में हर बाप की कोशिश होती है कि वह अपनी बेटी को ज्यादा से ज्यादा सशक्त बनाए, ताकि वह आगे चलकर किसी पर भी निर्भर न हो।

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* एक लड़की के जीवन में उसके पिता की भागीदारी उसे भावनात्मक और मानसिक रूप मजबूत बनाती है। जो बच्चे अपने पिता से जुड़े होते हैं, वे सामान्य समस्याओं के समाधान खोजने में बेहतर होते हैं। जब वे अपने पिता के करीब होती हैं तो वह बेटियां चिंतामुक्त होती हैं। ऐश्वर्या राय यूं ही नहीं बन गई अमिताभ बच्चन की लाडली, अच्छी बहू बनने के लिए करने पड़े थे कई जतन

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* बेटी के लिए पिता सबसे बड़ा शिक्षक होता है। एक पिता ही अपनी बेटी को क्या अच्छा है और क्या बुरा, ये सब सिखाता है। ऐसे में बेटियां भी अपने पिता के साथ जिंदगी के हर उस पहलू को शेयर करने से पीछे नहीं रहतीं।

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