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नाट्यकला सिखाती है जीवन संस्कारः डॉ. अमर सिंह

छिंदवाड़ा। माटी के रंग को सहेजे हुए प्रारंभ हुई ऑनलाइन कार्यशाला में रोज जानकार अपनी बात रख रहे हैं। किरदार सचिव ऋषभ स्थापक ने बताया कि किरदार संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘माटी के रंग किरदार के संग’ के माध्यम से जिले के अनुभवशील लोगों का लाभ नई पीढ़ी को प्राप्त हो रहा है। ओम मंच पर अस्तित्व के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में पांचवें सत्र में विशेष अतिथि शासकीय महाविद्यालय चांद के अंग्रेजी के विभाग प्रमुख व व्यक्तित्व विकास के जिला समन्वयक डॉ. अमर सिंह रहे।

उन्होंने कहा कि नाटक का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं है इससे बच्चे ना केवल शिक्षित होते हैं बल्कि उनमें व्यक्तित्व का सकारात्मक विकास भी होता है। हमारा साहित्य प्राचीन काल से ही बहुत समृद्ध रहा है। जिसके माध्यम से हम नाट्यकला के माध्यम से समाज को ज्ञानवर्धक संदेश देते रहे हैं। डॉ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि नाटक व्यक्तित्व निर्माण में एक बेहतरीन भूमिका अदा करता है। रंगमंच आपको संस्कारों के साथ ही अनुजों को प्रेम एवं अग्रजों का आदर भी सिखाता है। जीवन में आधारभूत सिद्धांतों का निर्माण करना, स्वावलंबी बनाना एवं अनुशासन लाना नाट्यकर्म की महत्वपूर्ण विशेषता है।

नाट्यकर्म को प्रारंभ करने के लिए अपने अहंकार का त्याग आवश्यक होता है एवं बाहरी शैक्षणिक योग्यता के गर्व को छोड़कर इस विधा में प्रवेश करना आवश्यक है साथ ही नाट्य विधा संगठन एवं नेतृत्व का विकास भी आपके भीतर करती है। जीवन एक रंगमंच की तरह ही होता है जिसमे सभी अलग अलग किरदार निभा रहे है दुनिया से चले जाते हैं। डॉ. सिंह ने पुरजोर तरीके से बाल शिक्षा में संगीत की तरह नाट्य शिक्षा के सिलेबस को शामिल करने की बात कही। जिससे छोटे शहरों के प्रतिभागियों को मुंबई जैसी जगहों में काम करने में परेशानी का सामना न करना पड़े।

कार्यशाला में रंगगुरू विजय आनंद दुबे एवं मार्गदर्शक नितिन जैन ‘नाना’ द्वारा प्रतिभागियों के उत्साह वर्धन हेतु विचार व्यक्त किए गए। अंत में कार्यशाला निर्देशक डॉ. पवन नेमा एवं संयोजक शिरिन आनंद दुबे ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। ऑनलाइन कार्यशाला में तकनीति सहायक विक्रम टीडीआर रहे। आयोजन में जिले के वरिष्ठ रंगकर्मी अरविंद रंजन कुण्डू एवं केशव कैथवास भी उपस्थित रहे।

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