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ई-मंडी बनने के बाद भी देश का व्यापारी नहीं खरीद पाया किसानों का अनाज

Publish Date: | Mon, 15 Jun 2020 04:08 AM (IST)

राष्ट्रीय कृषि बाजार योजनाः तीन वर्ष पहले कुसमेली मंडी को किया गया था ई-मंडी

फोटो-8

कुसमैली स्थित कृषि उपज मंडी

छिंदवाड़ा। तीन वर्ष पूर्व राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना के तहत व्यापार को बढ़ावा देने के लिए शासन ने प्रदेश की कई कृषि उपज मंडियों को ऑनलाइन करते हुए ई-मंडी बनाया था। महाकौशल की जबलपुर के साथ ही छिंदवाड़ा की कुसमेली मंडी को इस योजना में शामिल किया गया था। इस योजना के तहत जिले के किसान की उपज को देश में कहीं भी व्यापारी ऑनलाइन के माध्यम से खरीद सकता था तथा जिले के किसानों को गुणवत्ता के हिसाब से मूल्य मिल सकेगा। इस योजना के तहत मंडी बोर्ड ने कुसमेली मंडी को बजट दिया जिसमें अलग से शाखा खोलने के साथ ही कम्प्यूटर व लैब खोली गई तथा कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी गई। वर्तमान समय में ई-मंडी होने के बाद भी जिले के किसी भी किसान का एक किलो भी अनाज नहीं बिक पाया है। मंडी प्रबंधन ने इस राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना को फेल कर दिया है।

– ऐसे होना था व्यापार

मंडी पहुंचने वाले किसान का अनाज लैब में टेस्ट होता जिसके बाद गुणवत्ता के हिसाब से उसका मूल्य तय किया जाता। जिसकी ऑनलाइन नीलामी होती। देश भर के लाइसेंसी व्यापारी इस ई-नीलामी में शामिल होते तथा अनाज का रेट तय करते, लेकिन ना ही लैब में अनाज की टेस्टिंग हो पाई ना ही किसानों को इस बारे में किसी भी तरह की ट्रेनिंग दी गई। इस योजना के लागू होने के बाद से कार्य के नाम पर सिर्फ मंडी में आवक व जावक भर दर्ज की जा रही है। लैब में जो मशीन लाई गई है वह धूल खा रही है। मंडी प्रांगण में इसी योजना केतहत नई लैब बनाई गई है जिसका क्या उपयोग इसकी जानकारी भी मंडी कर्मचारियों को नहीं है।

– इन बातों पर स्थिति साफ नहीं

कृषि उपज मंडी कुसमेली को जब से ई-मंडी बनाया गया है तब से इस बात को लेकर असमंजस बना हुआ है जिसे मंडी प्रबंधन भी साफ नहीं कर पाया है कि ऑनलाइन ट्रेडिंग में भुगतान कैसे होगा। बिके हुए अनाज का परिवहन और भंडारण की व्यवस्था कैसी होगी। स्थानीय व्यापारियों के जरिए ट्रेडिंग होगी या एजेंसी नियुक्त होगी यह भी वर्तमान में भी स्पष्ट नहीं है। वर्तमान में किसानों को मंडी में नकद भुगतान मिलता है ऐसे में किसान भी ई-ट्रेडिंग को लेकर रुचि नहीं दिखा रहे है। पूर्व में मंडी बोर्ड द्वारा एक विश्लेषक की नियुक्ति की गई थी जिसने कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया था, लेकिन फिर भी कुछ नहीं हो पाया है।

– इनका कहना है।

ई-मंडी के बाद से किसानों के अनाज की खरीदी नहीं हुई है। नई लैब का निर्माण मंडी परिसर में कराया गया है जिसका उपयोग आने वाले समय में किया जाएगा। जिसको लेकर मंडी बोर्ड आने वाले दिनों में नए निर्देश जारी करेगा।

अशोक डेहरिया, सचिव, कृषि उपज मंडी कुसमेली, छिंदवाड़ा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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